Monday, April 2, 2012

जिंदगी क्या है ? हरिकेश हरिस

जिंदगी क्या है ?
सोचो जरा.

हवा का एक झोका.
दिखता नहीं एहसास होता है.

पानी का एक बुलबुला.
उठता है पर मिलता नहीं.

आग की ज्वाला.
पकड़ में आता नहीं, मगर जला जाता है.

एक सोच.
जो हम सोच पाते नहीं.

एक विचार.
जो हम कर पाते नहीं.

एक समस्या.
जो हम सुलझा पाते नहीं.

एक ख़ुशी .
जो हम मना पाते नहीं.

एक गीत.
जो हम गा पाते नहीं.

जिंदगी क्या है..सोचो जरा...  हरिकेश हरिस


बड़े बाबूजी श्री नगीना यादव

बड़े बाबूजी श्री नगीना यादव



बड़े बाबूजी श्री नगीना यादव

Monday, August 29, 2011

दोमाठ कोठी के धरोहर

    हमारा ताज, हमारा नाज़   दोमाठ में बहुत  पुराना कर्बला  
                       दोमाठ में अंग्रेजों की कचहरी
नील को  संरक्षित रखने का स्थान
                                      
                              नील फैक्ट्री के अवशेष
 अंग्रेजो के घोड़ो को पानी पिलाने वाला हौदा।
 भवानी गड़हा में सेबल के पेड़ के पास स्थित पुराना कुआं

Tuesday, July 26, 2011

दोमाठ कोठी का इतिहास


दोमाठ गाँव एक बहुत ही एतिहासिक गाँव है.यह उत्तरे प्रदेश के कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज तहसील के सेवरही ब्लाक में पड़ता है.इसकी चौहदी पूरब में भगवानपुर गाँव है,पश्चिम में बैजुपट्टी एवं झडवा गाँव है, उत्तर दिशा में भावपुर एवं कोटवा गाँव है.तथा दक्षिण में भुलिया आगरवा एवं तरिया हंसराज है. यहाँ पर श्री कृषण कि शादी हुई थी रुकमनी जी से. इस लिए यहाँ पर आज भी रुख्मणि घाट है. मुगलों के ज़माने का यहाँ पर एक बहुत पुराना कर्बला है, जहा पर ५० गाँव के ताजिये दफनाये जाते है. यहाँ पर अंग्रेजो के ज़माने का एक बहुत ही पुरानी नील कि फैक्ट्री है.जो लगभग 1866 में बना था.और यहाँ से नील के कच्चे मॉल को लन्दन भेजा जाता था.यहाँ पर पुराने गरुण देव का स्थान भी है.यहाँ पर आजादी के बाद से सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान का कार्यकाल श्री नगीना यादव का रहा है. वह 1967 से अभी तक ग्राम प्रधान है. यहाँ के एतिहासिक जानकारियों के लिए हरिकेश यादव आज भी सूचनाये जुटा रहे है....

Friday, March 18, 2011

मेरे गाँव कि मिटटी कि खुश्बू कभी ना भूल पायेगी.........

मेरे गाँव कि मिटटी कि खुश्बू कभी ना भूल पायेगी,
जिन्दगी जहाँ जहाँ तक जाएगी, वहां तक याद आयेगी.
जन्म का रिश्ता बना है इससे हमें ये बहुत सताएगी.
मेरे गाँव कि मिटटी कि खुश्बू कभी ना भूल पायेगी,